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Sunday, April 12, 2020

वक्त की बात, गेहूं के बदले गोली,भारत कोरोना से लड़ने के साथ ही दुनिया की भी सहायता करने में पीछे नहीं है। भारत ने चुका दिया अमेरिका का कर्ज

वक्त की बात, गेहूं के बदले गोली,भारत कोरोना से लड़ने के साथ ही दुनिया की भी सहायता करने में पीछे नहीं है। भारत ने चुका दिया अमेरिका का कर्ज

वक्त-वक्त की बात है। कभी भारत ने अनाज की कमी से निपटने के लिए अमेरिका से मदद मांगी थी। अब दुनिया का यह सुपर पावर देश कोरोना के खिलाफ जंग में नई दिल्ली से मदद मांग रहा है। कोविड-19 ने अमेरिका को घुटनों के बल पर ला दिया है। रोज हो रही सैंकड़ों मौतों से परेशान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) दवा की गुहार लगाई। 50 के दशक से आज 2020 तक दुनिया में कई चीजें बदलीं। भारत दुनिया की सबसे तेज गति से उभरने वाला अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब वह वॉशिंगटन की मदद कर रहा है।
नेहरू ने मांगी थी अमेरिका से मदद 1951 में देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अनाज की कमी से जूझ रहे देश के लिए अमेरिका से मदद मांगी थी। 12 फरवरी 1951 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने भारत को अनाज की कमी से निपटने के लिए कांग्रेस में भारत को 20 लाख टन आपात मदद की अनुशंसा की थी। उन्होंने कहा, 'हम भारत की अपील पर बहरे बने नहीं रह सकते हैं।'



तत्कालीन US राष्ट्रपति ट्रूमैन ने भरी थी हामी
तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन ने कहा था, 'भारत के लोगों के प्रति हमारी दोस्ती और लोगों को भूखे नहीं रहने देने की हमारी चिंता ही हमें यह कदम उठाने को प्रेरित कर रही है।' हालांकि उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति के संदेश को भारत की अनाज की कमी को दूर करने के मानवीय आधार पर देखा गया लेकिन ट्रूमैन और उनके सलाहकारों का मानना था कि नई दिल्ली के आग्रह पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करने से दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्ते भी बनेंगे। भारत और अमेरिका के बीच तल्खी के बीच ट्रूमैन ने यह अपील की थी।
अमेरिका ने की थी भारत की मदद
नेहरू के इन सिद्धांतों से चिढ़ता था अमेरिका
अमेरिका भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत से चिढ़ता रहा था। इसके अलावा चीन को लेकर भारत की नीति, कोरियाई युद्ध, पश्चिम उपनिवेशवाद और अन्य मुद्दों पर भारत के रुख अमेरिका और नई दिल्ली के बीच रिश्तों को तल्ख बना रहे थे।

अपने फायदे के लिए US ने की भारत की मदद
ट्रूमैन को लगा था कि भारत को अनाज संकट के दौरान मदद करके उसे अहसास दिलाया जा सकता है कि नई दिल्ली का असली हित पश्चिमी देशों संग है। अमेरिकी कांग्रेस ने लंबी बहस के बाद भारत को अनाज भेजने को अपनी रजमंदी दे दी थी।

अब कुछ यूं बदल गया वक्त
1951 से 2020 तक करीब 70 सालों में बहुत कुछ बदल चुका है। भारत आज खाद्यान उत्पादन आत्मनिर्भर हो चुका है। लेकिन अब हो रहा है उल्टा। अमेरिका भारत के सामने एक दवाई के लिए हाथ फैला रहा है और भारत उसे जल्द ही यह दवा उपलब्ध कराने वाला है।

भारत की वाह-वाह कर रहे हैं ट्रंप
कोरोना महामारी के भयानक संकट के दौर से गुजर रहे अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात को भारत सरकार की मंजूरी मिलने के बाद पीएम मोदी की तारीफ कर रहे हैं। ट्रंप काफी खुश हैं। बुधवार को ट्वीट कर ट्रंप ने भारत के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की। उन्होंने पीएम मोदी और भारतीय लोगों का धन्यवाद करते हुए अपने ट्वीट में कहा कि भारत की इस मदद को भुलाया नहीं जाएगा। माना जा रहा है कि मलेरिया की यह दवा कोरोना से लड़ने में कारगार है। हालांकि न तो वैज्ञानिक और न ही डॉक्टर इस बात की पुष्टि कर रहे हैं।

4 दिनों में 8 राज्यों में दोगुने हुए कोरोना के मरीज
पहले ट्रंप ने दिखाई थीं आंखें, अब कह रहे याद रखेंगे
ट्रंप ने इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद मांगी थी। उन्होंने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात न करने पर भारत पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही थी। भारत सरकार द्वारा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने के बाद ट्रंप के सुर अचानक बदल गए और उन्होंने एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देने के दौरान पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने मोदी को महान नेता बताया। उन्होंने कहा कि वह भारत की इस मदद को याद रखेंगे।
sourse: novebhart.times

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