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Friday, October 4, 2019

Tips how to be successful in life | way to success

Tips how to be successful in life | way to success

 जीवन में सफलता कैसे पाएं, के खास तरीके

Tips how to be successful in life | way to success

पहला कदम : जिम्मेदारी स्वीकार करें 

"जिम्मेदारियां उस व्यक्ति की तरफ खींची चली आती है जो उन्हें कंधे पर उठा सकता है। "                                                          -अल्बर्ट

जब लोग अतिरिक्त जिम्मेदारियों को स्वीकार करते हैं, तो दरअसल वे अपनी उन्नति का दरवाजा खोल रहे होते हैं। 

 जवाबदेही को स्वीकार करना ही जिम्मेदार व्यवहार है और यह उसकी समझदारी और परिपक्वता को दिखाता है।  जिम्मेदारी कबूल करने की भावना हमारे नज़रिए और उस माहौल की छवि होती है, जिसमे हम काम करते हैं।  ज्यादातर लोग कुछ अच्छा होने पर तुरंत श्रेय ले लेते हैं, मगर बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो गलती होने पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।  अगर एक व्यक्ति जिम्मेदारियों को स्वीकार नहीं करता, तो उनसे उसे छुटकारा नहीं मिलता है, इसलिए आपका मकसद जिम्मेदार व्यवहार का विकास होना चाहिए। 

इल्जाम लगाने का खेल बंद करें-

  •  यह कहना छोड़ दें कि-
  •  हर कोई ऐसा करता है,
  •  ऐसा तो कोई नहीं करता,
  •  सारा दोष तुम्हारा है। 

जो लोग खुद जिम्मेदारी नहीं उठाते, वह लोग मां-बाप, गुरु, वंश, ऊपरवाले, भाग्य,   ग्रह-नक्षत्रों को दोष देते हैं।  जिम्मेदार व्यवहार का विकास बचपन से ही किया जाना चाहिए, लेकिन अगर किसी में एक हद तक आज्ञा पालन की भावना न हो, तो उसे इस तरह का व्यवहार करना नहीं सिखाया जा सकता। 

नेकी बोला, "मम्मी, जिम्मी ने खिड़की का शीशा तोड़ दिया।"  माँ ने पूछा, उसने ऐसा कैसे किया?" नेकी ने उत्तर दिया, "जब मैंने उस पर पत्थर फेंका, तो वह झुक गया।"


जो लोग बिना जिम्मेदारी स्वीकार किए अपने अधिकारों का प्रयोग करते हैं, वह अक्सर अपने अधिकारों को भी खो बैठते हैं। 

 जिम्मेदारी के दायरे में सोच विचार कर काम करना भी शामिल है। 


दूसरा कदम : औरों की परवाह 

एक दिन एक 10 साल का बच्चा एक आइसक्रीम की दुकान पर गया और टेबल पर बैठकर एक महिला वेटर से पूछा, "एक कौन आइसक्रीम कितने की है? उसने कहा, 75 रुपय की।"  बच्चा हाथ में पकड़े सिक्को को गिनने, लगा फिर उसने पूछा कि छोटी कप वाली आइसक्रीम कितने की है? वेटर ने बेसब्री से कहा "65 रुपय की" लड़का बोला, "मुझे छोटा कप ही दे दो।" लड़का अपना आइसक्रीम खाया, पैसे दिया और चला गया।  जब वेटर खाली प्लेट उठाने के लिए आई तो उसने जो कुछ देखा, वह बात उसके मन को छू गई।  वहां 10 रुपय 'टिप' के रखे हुए थे।  उस छोटे बच्चे ने उस वेटर का ख्याल किया।  उसने संवेदनशीलता दिखाई थी। उसने खुद से पहले दूसरे के बारे में सोचा।

 अगर हम सब एक दूसरे के लिए उस छोटे बच्चे की तरह सोचे, तो यह दुनिया कितनी हसीन हो जाएगी।  दूसरों को ख्याल करें और नम्रता व विशिष्ठता दिखाएं।  दुसरो का ख्याल रखना यह दिखाता है कि हम उसकी परवाह करते हैं।

तीसरा कदम :अच्छे श्रोता बने
 हम लोगों को अक्सर कहते हैं कि बातचीत की कला मर रही है, लेकिन क्या हम को नहीं लगता कि अच्छा श्रोता मिलना काफी मुश्किल है।  वास्तव में एक अच्छा श्रोता काफी मूल्यवान होता है। 

 खुद से यह सवाल करें, हमको कैसा लगता है जब हम चाहते हैं कि कोई व्यक्ति हमारी बात सुने लेकिन-


  • वे सुनने से ज्यादा बोले
  • हमारी पहली बात पर ही असहमति प्रकट करें
  • वे हमको हर कदम पर टोके
  • वे बेसब्री दिखाएं और हमारे हर वाक्य को खुद पूरा करें 
  • वे  शरीर से तो मजबूत हो लेकिन उसका दिमाग कहीं और हो
  • वे  सुने लेकिन समझे नहीं, हमको हर बात तीन बार दोहरानी पड़े क्योंकि वह हमारी बात ध्यान से नहीं सुन रहे
  •  वे ऐसे नतीजे पर पहुंचे जिनका तथ्यों से कोई मतलब नहीं है
  • वे ऐसे सवाल पूछे जिनका बातचीत से मुद्दों से कोई रिश्ता नहीं है
  • वे बेचैन लग रहे हो और उनका ध्यान इधर उधर भटक रहा हो
  • वे हमारी बातों पर न तो ध्यान दे रहे हो, और न उन्हें सुन रहे हो



यह सभी बातें इस बात को दिखाती है कि उस इंसान को हममे या बातचीत के मुद्दे में कोई दिलचस्पी नहीं है, और उसमें शिष्टाचार का अभाव है। 



खुले दिल वाला होने की एकमात्र विश्वसनीय पहचान है, खुले कान वाला भी होना।                                                                    -डेविड ऑस  बर्गर


एक अच्छा श्रोता बनने के लिए-

Tips how to be successful in life | way to success


  • दूसरे को बोलने के लिए उत्साहित करें। 
  •  सवाल पूछे।  यह हमारी दिलचस्पी को दिखाता है। 
  •  वक्ता के बोलते समय रुकावट न डालें।
  •  विषय न बदले। 
  •  सम्मान और समाज का भाव दिखाएं। 
  •  ध्यान से सुने इधर-उधर ध्यान भटकने वाली चीजों से बचें। 
  •  अपने आपको दूसरों के स्थान पर रखकर देखें। 
  •   खुले विचारों वाला बने। अपनी पहले से बनी धारणाओं और राय को अपने सुनने में बाधा नहीं बनने दे। 
  •  संदेश पर ध्यान दें ना कि कहने के सलीके पर।  
  •  भावों को समझे न सिर्फ शब्दों को सुनें। 
दोस्तों इससे अगला भाग अगली पोस्ट में मिलेगा, अगर पोस्ट अच्छी लगी तो कमेंट बॉक्स में बताएं की अगली पोस्ट बनानी है या नहीं ?

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