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Wednesday, October 2, 2019

नजरिया बदलने के ये खास कदम motivation psychology

नजरिया बदलने के ये खास कदम

 अगर हम सकारात्मक नजरिया बनाना और कायम रखना चाहते हैं, तो हमको सावधानीपूर्वक यह कदम उठाने पड़ेंगे। 
नजरिया बदलने के ये खास कदम

पहला कदम- अपनी सोच बदलें और अच्छाई खोजें:-

हमें अच्छी चीजों का खोजी बनना पड़ेगा।  हमें जिंदगी के सकारात्मक पहलू पर ध्यान देना होगा।  किसी इंसान, या किसी हालात के बुरे पहलू के बजाय उसके अच्छे पहलू पर गौर करना शुरू करें। हम में से ज्यादातर लोगों को अपनी ही सोच का माहौल इस ढंग से डाल देता है कि हम गलतियों और कमियों को ढूंढने के आदी हो चुके होते हैं; और इसलिए तस्वीर का अच्छा पहलू हमसे अनदेखा रह जाता है। 


सोने की तलाश में एंड्रयू कार्नेगी अपने बचपन के दिनों में ही स्कॉटलैंड से अमेरिका चले गए।  उन्होंने छोटे-मोटे कामों से शुरुआत की, और आखिरकार अमेरिका में स्टील बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी के मालिक बन गए।  एक ऐसा वक्त आया जब उनके लिए 43 करोड़पति काम करते थे।  करोड रुपए इस जमाने में भी बहुत होते हैं लेकिन सन् 1920 के आसपास तो उनकी बहुत ज्यादा कीमत थी।  किसी ने कार्नेगी से पूछा, "आप लोगों से कैसे पेश आते हैं?" उन्होंने जवाब दिया- "लोगों से पेश आना काफी हद तक सोने की खुदाई करने जैसा ही है। हमको एक तोला सोना खोद निकालने के लिए कहीं टन मिट्टी हटानी पड़ती है।  लेकिन खुदाई करते वक्त हमारा ध्यान मिट्टी पर नहीं, बल्कि सोने पर रहता है। "एंड्रयू कार्नेगी के जवाब में एक बहुत महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है।हो सकता है कि किसी इंसान ,या किसी हालात में कोई अच्छी बात साफ तौर पर ने दिखाई दे रही हो। ऐसी हालात में हमें उसे गहराई में जाकर तलाशना होगा। 

हमारा मकसद क्या है? सोना तलाशना।  अगर हम किसी इंसान, या किसी चीज में कमियां ढूंढेंगे, तो हमको ढेरों कमियां दिखाई देगी।  लेकिन हमें किस चीज की तलाश है- सोने की, या मिट्टी की? कमियां ढूंढने वाले तो स्वर्ग में भी कमी निकाल देंगे। अधिकतर लोगों को वही मिलता है, जिसकी उन्हें तलाश होती है। 


कुछ लोग हमेशा नकारात्मक पहलू को देखते हैं

कुछ लोग हर चीज में नुक्स निकालते हैं।  कोई काम भले ही बहुत अच्छी तरह किया गया हो, पर उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।  ऐसे लोगों ने नुक्स निकालने को ही अपना पैसा बना लिया है।  वह पेशेवर आलोचक हैं। वह इस तरह नुक्ताचीनी करते हैं, जैसे कि उन्हें इसके लिए किसी प्रतियोगिता में इनाम मिलने वाला हो। वह हर एक इंसान में और हर एक हालात में कोई-न-कोई नुक्स ढूँढ ही निकालेंगे।  हमें ऐसे लोग हर दफ्तर और हर परिवार में मिल जाएंगे। वह चारों और कमियाँ ढूंढते हैं और यह बताते फिरते हैं कि चीज कितनी बुरी है।  वह अपनी समस्याओं के लिए पूरी दुनिया को दोषी मानते हैं।  यह लोग दूसरों के जोश पर पानी फेर देते हैं।  ऐसे लोगों के लिए एक नाम है।  यह लोग ताकत को चूसने वाले कहलाते हैं।  ऐसे लोग कैफेट्रिया में जाकर बीसियों कप चाय पिएंगे, सिगरेट के लंबे लंबे कश खींचेंगे और यह सब करने का उनके पास केवल एक बहाना रहता है कि वह अपने तनाव को दूर कर रहे हैं। हकीकत यह है कि ऐसा करके वह खुद के लिए, और दूसरों के लिए तनाव और बढ़ा देते हैं। वे  प्लेग की बीमारी की तरह हर तरफ मायूसी का पैगाम फैलते है और ऐसा माहौल पैदा करते हैं जिसके नतीजे बुरे या गलत हो। 



निराशावादी लोगों के यह लक्षण होते हैं-


1.  जब चर्चा करने के लिए उनके पास कोई तकलीफ नहीं होती, तो वह नाखुश रहते हैं। 

2.  उन्हें जब कुछ अच्छा लगता है, तो वह यह सोचकर नाखुश हो जाते हैं कि बेहतर महसूस करने के बाद उन्हें फिर बदतर महसूस करना होगा। 

3.  उनकी जिंदगी का ज्यादातर वक्त शिकायत काउंटर पर बीतता है। 

4.  हमेशा बत्ती बुझा कर देखना चाहते हैं कि अंधेरा कितना है?

5.  वह जिंदगी के आईने में हमेशा दरारे तलाशते हैं। 

6.  यह सुन लेने पर कि किसी और जगह की तुलना में बिस्तर पर ज्यादा लोगों की मौत होती है, वह बिस्तर पर सोना छोड़ देते हैं। 

7.  वह इस अंदेशे की वजह से अपनी सेहत का मजा नहीं ले पाते कि कल वे बीमार पड़ सकते हैं। 

8.  वह बदतर नतीजों के बारे में सोचते भर नहीं है, बल्कि हर घटना को बदतर बना भी देते हैं। 

9.  उन्हें चांद में केवल धब्बे दिखाई देते हैं। 

10  वे मानते हैं कि सूरज केवल परछाइयां पैदा करने के लिए चमकता है। 

11. वे सहूलियतों  को भूलकर केवल अपनी दिक्कतें गिनते हैं। 

12.  वह जानते हैं कि कड़ी मेहनत से किसी को नुकसान नहीं पहुंचता पर सोचते हैं कि कोई खतरा क्यों उठाया जाए। 

 चेतावनी-अच्छे पहलू पर ध्यान देने का यह मतलब नहीं है कि कमियों को नजरअंदाज कर दिया जाए। 

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