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Monday, September 30, 2019

Short Story | Short Story In Hindi

Short Story | Short Story In Hindi 

स्वार्थ और लालच की स्टोरी
Short Story | Short Story In Hindi


 स्वार्थी नजरिया रखने वाले लोग, और संगठनों को पनपने का कोई हक नहीं है।  यह दूसरों के हितों की परवाह किए बिना आगे बढ़ने की सोचते हैं।  लालची आदमी हमेशा और अधिक पाने की इच्छा है रखता है।  जरूरतें पूरी की जा सकती है, लेकिन लालच नहीं।  यह मन का कैंसर होती है।  लालच रिश्तो को नष्ट कर देता है।  लालच आत्म सम्मान की कमी की वजह से पैदा होता है। 

 इसका अंत कहां है?
"एक लालची किसान से कहा गया किवह दिन में जितनी जमीन पर चलेगा वह उसकी हो जाएगी, बशर्ते वह सूरज डूबने तक शुरू करने की जगह पर वापस लौट आए।  ज्यादा से ज्यादा जमीन पाने के लिए वे किसान दूसरे दिन सूरज निकलने से पहले ही निकल पड़ा।  वह काफी तेजी से चल रहा था क्योंकि वह ज्यादा से ज्यादा जमीन हासिल करना चाहता था।  थकने के बावजूद वे सारी दोपहर चलता रहा, क्योंकि वह जिंदगी में दौलत कमाने के लिए हासिल हुए उस मौके को गंवाना नहीं चाहता था।  

दिन ढलते वक्त उसे वह शर्त याद आई कि उसे सूरज डूबने से पहले शुरुआत की जगह पर पहुंचना है।  अपनी लालच की वजह से वह उस जगह से काफी दूर निकल आया था।  वह वापस लौट पड़ा।  सूरज डूबने का वक्त ज्यों-ज्यों करीब आता जा रहा था, वह उतनी ही तेजी से दौड़ता जा रहा था।  वह बुरी तरह थक कर हम अपने लगा, फिर भी वह बर्दाश्त से अधिक तेजी से दौड़ता रहा, नतीजा यह हुआ कि सूरज डूबते- डूबते वह शुरुआत वाली जगह पर पहुंच गया, पर उसका दम निकल गया, और वह मर गया।  उसको दफना दिया गया, और उसे दफन करने के लिए जमीन के बस एक छोटे से टुकड़े की ही जरूरत पड़ी।" 

moral:
 इस कहानी में काफी सच्चाई और एक सबक  छुपा है।  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसान अमीर था या गरीब किसी भी लालची आदमी का ऐसा ही हाल  होता है। 



 शॉर्टकट की तलाश स्टोरी 

भोजन मुफ्त में नहीं मिलता


 एक राजा ने अपने सलाहकारों को बुलाकर उनसे बीते इतिहास की सारी समझदारी भरी बातें लिखने के लिए कहा, ताकि वह उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचा सके।  उन्होंने काफी मेहनत कर समझदारी भरी बातों पर कई किताबें लिखी, और उन्हें राजा के सामने पेश किया।  राजा को भी किताबे काफी भारी-भरकम लगी।  उसने सलाहकारों से कहा कि लोग इन्हें पढ़ नहीं पाएंगे, इसलिए इन्हें छोटा करो।  सलाहकारों ने फिर काम किया, और केवल एक किताब लेकर आए।  राजा को वह भी काफी मुश्किल लगी।  सलाहकारों ने उसे और छोटा किया।  इस बार भी केवल एक अध्याय लेकर आए राजा को वह भी काफी लंबा लगा। तब सलाहकारों ने उसे और छोटा कर केवल एक पन्ना पेश किया।  लेकिन राजा को एक पन्ना भी लंबा लगा।  आखिरकार वे राजा के पास केवल एक वाक्य लिख कर ले गए और राजा संतुष्ट हो गया। राजा ने कहा कि अगर उसे आने वाली पीढ़ियों तक समझदारी का केवल एक वाक्य पहुंचाना हो तो वह यह वाक्य होगा "भोजन मुफ्त में नहीं मिलता"

Moral:
"भोजन मुफ्त में नहीं मिलता" का मतलब दरअसल यह है कि हम कुछ दिए बिना कुछ पा नहीं सकते।  दूसरे लफ्जों में कहें, तो हम जो लगाते हैं, बदले में वही पाते हैं, अगर हमने किसी योजना में ज्यादा लागत नहीं लगाई है, तो हमको ज्यादा फायदा भी नहीं मिलेगा।  बेशक, हर समाज में ऐसे मुफ्त खोर भी होते हैं, जो कुछ किए बिना ही पाने की उम्मीद लगाए रखते हैं। 

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